परिचय
कुनाफा (Kunafa या Knafeh) एक पारंपरिक मध्य-पूर्वी मिठाई है, जो अपनी कुरकुरी परत, अंदर से मुलायम और रस से भरे स्वाद के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। पहली नज़र में यह सुनहरी जाली जैसी मिठाई दिखाई देती है, लेकिन जैसे ही आप इसे काटते हैं, अंदर से पिघला हुआ चीज़ या क्रीम बाहर आता है। यही इसका असली जादू है—बाहर से क्रिस्पी और अंदर से नरम, मीठा और लज़ीज़।
आज के समय में कुनाफा सिर्फ अरब देशों तक सीमित नहीं रहा। यह भारत, पाकिस्तान, तुर्की, यूरोप और अमेरिका तक अपनी पहचान बना चुका है। बड़े शहरों में अब यह शादियों, ईद, रमज़ान और खास मौकों पर खासतौर से परोसा जाता है।
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कुनाफा की शुरुआत कहां से हुई?
कुनाफा की जड़ें लगभग 1000 साल पुरानी मानी जाती हैं। इसका उद्भव लेवांत क्षेत्र में हुआ था, जिसमें आज के फिलिस्तीन, लेबनान, जॉर्डन और सीरिया शामिल हैं। इतिहासकारों के अनुसार यह मिठाई फातिमी खलीफा के समय (10वीं सदी) में लोकप्रिय हुई।
कहा जाता है कि इसे खास तौर पर रोज़ा खोलने के लिए बनाया गया था, क्योंकि इसमें मौजूद शक्कर और चीज़ शरीर को तुरंत ऊर्जा देते हैं। फिलिस्तीन के नाबलुस शहर का “कनाफे नाबुलसी” आज भी सबसे असली और पारंपरिक रूप माना जाता है।
समय के साथ यह मिठाई ओटोमन साम्राज्य के दौर में तुर्की और अन्य क्षेत्रों में फैली। आज हर देश में इसका थोड़ा अलग रूप देखने को मिलता है।

कुनाफा बनाने के लिए क्या-क्या सामग्री चाहिए?
कुनाफा बनाने के लिए बहुत ज्यादा जटिल सामग्री की जरूरत नहीं होती। मुख्य सामग्री इस प्रकार है:
कुनाफा आटा (कातायिफी/पतली जालीदार सेवई जैसी परत)
मक्खन या घी
मोज़रेला चीज़ या पारंपरिक सफेद चीज़
चीनी
पानी
गुलाब जल या केवड़ा जल
पिस्ता (सजावट के लिए)
वैकल्पिक सामग्री:
मलाई या कस्टर्ड
कंडेंस्ड मिल्क
फूड कलर (पारंपरिक नारंगी रंग के लिए)
चॉकलेट, नुटेला या आम की प्यूरी
कुनाफा कैसे बनाई जाती है?
1. चाशनी तैयार करना
सबसे पहले चीनी और पानी को उबालकर गाढ़ी चाशनी बनाई जाती है। इसमें थोड़ा गुलाब जल या केवड़ा मिलाकर खुशबू दी जाती है। चाशनी को ठंडा होने दिया जाता है।
2. आटा तैयार करना
कुनाफा की पतली जालीदार सेवई को हाथों से अलग किया जाता है और उसमें पिघला हुआ मक्खन अच्छी तरह मिलाया जाता है।
3. बेस बनाना
बेकिंग ट्रे को चिकना करके उसमें आधा आटा दबाकर बिछाया जाता है।
4. भरावन डालना
अब ऊपर से चीज़ या मलाई की मोटी परत डाली जाती है।
5. ऊपर की परत
बाकी बचा हुआ आटा ऊपर फैलाकर हल्के हाथ से दबाया जाता है।
6. बेक करना
इसे 180 डिग्री सेल्सियस पर तब तक बेक किया जाता है जब तक ऊपर से सुनहरा रंग न आ जाए।
7. चाशनी डालना
बेक होने के बाद गरम कुनाफा पर ठंडी चाशनी डाली जाती है और ऊपर से पिस्ता छिड़का जाता है।
गरम-गरम परोसने पर इसका स्वाद सबसे बेहतरीन लगता है।
कुनाफा खाने के फायदे
हालांकि यह एक मिठाई है, फिर भी सीमित मात्रा में खाने पर कुछ फायदे मिल सकते हैं:
तुरंत ऊर्जा देता है – इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट और शक्कर शरीर को तुरंत ताकत देते हैं।
कैल्शियम का स्रोत – चीज़ होने के कारण यह हड्डियों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
मूड बेहतर करता है – मीठा खाने से दिमाग में खुशी वाले हार्मोन रिलीज होते हैं।
त्योहारों का आनंद बढ़ाता है – सामाजिक जुड़ाव और खुशियों का प्रतीक है।
कुनाफा खाने के नुकसान
हर मीठी चीज़ की तरह इसके भी कुछ नुकसान हो सकते हैं:
ज्यादा कैलोरी – वजन बढ़ने की संभावना।
शुगर ज्यादा – डायबिटीज़ मरीजों के लिए हानिकारक।
फैट की मात्रा अधिक – मक्खन और चीज़ के कारण।
नियमित सेवन नुकसानदायक – रोज़ खाने की आदत से स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
इसलिए इसे कभी-कभार और सीमित मात्रा में ही खाना बेहतर है।
सबसे ज्यादा कहां बनाई और खाई जाती है?
कुनाफा सबसे ज्यादा फिलिस्तीन, लेबनान, जॉर्डन, मिस्र, तुर्की, सऊदी अरब और यूएई में बनाई जाती है।
भारत में हैदराबाद, मुंबई, दिल्ली और केरल जैसे शहरों में यह काफी लोकप्रिय हो रही है। खासकर रमज़ान के महीने में इसकी मांग बहुत बढ़ जाती है।
लोग इसे ज्यादा कब और क्यों खाना पसंद करते हैं?
रमज़ान में इफ्तार के बाद
ईद और शादियों में
खास मेहमानों के स्वागत में
परिवार के साथ डिनर के बाद
ठंड के मौसम में गरम-गरम कुनाफा खाने का मज़ा ही अलग होता है।
आधुनिक समय में कुनाफा
आजकल कुनाफा के कई नए फ्लेवर बाजार में मिलते हैं:
चॉकलेट कुनाफा
लोटस बिस्कॉफ कुनाफा
आम फ्लेवर कुनाफा
आइसक्रीम कुनाफा
सोशल मीडिया और फूड ब्लॉग्स ने इसे और भी लोकप्रिय बना दिया है। इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर इसके वीडियो लाखों बार देखे जाते हैं।
सांस्कृतिक महत्व
कुनाफा सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि एक परंपरा है। अरब देशों में इसे बड़े तांबे के बर्तनों में बनाया जाता है और परिवार के सभी सदस्य मिलकर खाते हैं। यह मिल-बांटकर खुशी मनाने की भावना का प्रतीक है।
निष्कर्ष
कुनाफा एक ऐसी शाही मिठाई है जो सदियों से लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए है। इसकी कुरकुरी परत, अंदर से पिघलता हुआ चीज़ और खुशबूदार चाशनी इसे खास बनाती है।
हालांकि यह स्वास्थ्य के लिए रोज़ खाने योग्य नहीं है, लेकिन त्योहारों और खास मौकों पर इसका स्वाद लेना एक यादगार अनुभव होता है।
अगर आपने अभी तक कुनाफा नहीं चखा है, तो एक बार जरूर ट्राई करें। यह सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि इतिहास, परंपरा और स्वाद का अद्भुत संगम है।